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महर्षि महेश योगी की ऋषिकेश की चौरासी कुटिया फिर से होगी गुलजार

दुनिया भर में धूम मचाने वाले बीटल्स बैंड के गीतों की रचना 60 के दशक में जिस जमीन पर हुए थी, आज भले ही वो जगह दुर्दशा की शिकार है, मगर अब वही जगह ऋषिकेश स्थित महृषि महेश योगी की चौरासी कुटिया फिर से गुलजार होने जा रही है। एक बार फिर से इस कुटिया में योग और ध्यान के साथ बीटल्स के सुरीले संगीत की धुनें भी सुनाई देंगी। उत्तराखंड सरकार ने उपेक्षा की शिकार महर्षि महेश योगी की चौरासी कुटिया की सुध ली है । उत्तराखंड पयर्टन विभाग बीटल्स की 50वीं वर्षगांठ पर चौरासी कुटिया को फिर से विकसित करने जा रहा है जिससे दुनिया के कई देशों के लिए आकर्षण का केंद्र फिर से गुलजार हो सकता है। राज्य के पयर्टन मंत्री सतपाल महाराज का कहना है कि हम इस महर्षि महेश योगी की चौरासी कुटिया को एक बड़ा पयर्टन ओर आध्यात्मिक केंद्र बनाना चाहते है। इसके लिए हम 1 मार्च से 7 मार्च 2018 को रिअहिकेश में आयोजित किये जा रहे अंतरराष्ट्रीय योग महोत्सव के दौरान बीटल्स की जन्मस्थली चौरासी कुटिया में भी योग और ध्यान के कई कार्यक्रम आयोजित करेंगे। बीटल्स की यादों को ताज करने के लिए इंग्लिश बैंड द मॉक बीटल्स को भी कार्यक्रम में आमंत्रित किया गया है। ये बैंड चौरासी कुटिया में बीटल्स के गीतों को अपनी जादुई धुनों के लोगो को झंकृत कर देगा। 3 दिन तक ये बैंड योग महोत्सव में अपनी प्रस्तुतियां देगा। उत्तराखंड वन विभाग भी इस कार्यक्रम में अपना सहयोग कर रहा है। बीटल्स के गीतों की रचना के बाद दुनिया भर में आकर्षण का केंद्र बने महर्षि महेश योगी की यादों को चिरस्थाई बनाने के लिए ऋषिकेश के परमार्थ आश्रम ने भी पहल की है। 1 से 7 मार्च तक ऋषिकेश के परमार्थ आश्रम में आयोजित अन्तर्राष्ट्रीय योग महोत्सव महर्षि महेश योगी ओर बीटल्स को समर्पित रहेगा।

क्या है बीटल्स ओर किसने की थी इसकी रचना-

इंग्लिश रॉक बैंड द बीटल्स से जुड़े इंग्लैंड के लिवरपूल के 4 युवकों ने बीटल्स बैंड की स्थापना की थी। ये चार युवक जॉन लेनन, पॉल मैक काटनी, जॉर्ज हैरिसन, ओर रिंगो स्टर फरवरी 1968 में अपनी पत्नियों ओर महिला मित्र के साथ पहली बार ऋषिकेश की महर्षि महेश योगी के ध्यान केंद्र में आये थे। नशे के आदि ये चारों युवक नशे के जरिये शांति की खोज में यंहा आये थे। मगर यंहा आकर महेश योगी के संपर्क में आकर योग ओर अध्यात्म के अनुभव ने इनकी जिंदगी और जीने का नजरिया ही बदल डाला । करीब 45 दिन महर्षि महेश योगी के आश्रम में रहे बीटल्स से जुड़े ये चारों युवा फेब फोर के नाम से मशहूर हुए। जिस नशे के जरिये फेब फॉर शांति की खोज कर रहे थे वही अब नशे की दुनिया को छोड़कर योग और अध्यात्म की दुनिया मे ऐसे रम गए कि यंहा के शांत वातावरण में इन्होंने बीटल्स के गीतों की रचना की। भारतीय वैदिक परंपरा की इस दुनिया मे फेब फॉर इतना ज्यादा लीन हो गए थे कि ॐ शांति ओम का जाप करते हुए उन्होंने 48 गीतों की रचना कर डाली। इन गीतों ने व्हाइट एलबम ओर ऐबी रोड नामक पाश्चात्य एलबम में जगह पाकर पूरी दुनिया मे धूम मचाई। फेब फॉर जॉन लेनन , जॉर्ज हैरिसन, रिंगो स्टर ओर पॉल मैक ने लिवरपूल में इंग्लिश रॉक बैंड बीटल्स की सन 1960 में स्थापना की थी। ये चारों पाश्चात्य संगीत को दुनिया भर में बिखेरने निकले थे और नशे के आदि ये युवक शांति की तलाश करते करते महर्षि महेश योगी के आश्रम ऋषिकेश पंहुच गए थे। परमार्थ आश्रम में स्वामी चिदानंद सरस्वती कहते है कि 4 युवक महृषि के ध्यान केंद्र में आये और इन चारों का विशाद यानी दुःख महृषि के आशीर्वाद से सुख में बदल गया था । फेब फोर के चार युवाओ में से केवल रिंगो स्टर ओर पॉल मैक ही अब जीवित है जो 1 से 7 मार्च को होने वाले महोत्सव में शामिल होंगे।

क्या है चौरासी कुटिया-

प्रख्यात आद्यात्मिक ओर योग गुरु महृषि महेश योगी ने गंगा के नजदीक पहाड़ो की सुरम्य वादियों में एक भारतीय ध्यान केंद्र की स्थापना की थी। ऋषिकेश के स्वर्गाश्रम के पास गंगा नदी से करीब 50 मीटर ऊपर जंगल मे उत्तर प्रदेश वन विभाग से सन 1960 में महृषि महेश योगी ने ध्यान केंद्र के लिए 15 एकड़ भूमि लीज पर ली थी। 38 सालों के लिए लीज पर ली गई भूमि के लिए महृषि की शिष्या अमेरिकन महिला डोरिक ड्यूक ने उन्हें एक लाख डॉलर की धनराशि दान में दी थी । इसी दान की राशि ने महृषि ने सन 1963 में यंहा पर ध्यान केंद्र और 84 कुटियों की स्थापना की। गुफाओं के आकार में बनी कुटियों बीच मे ध्यान केंद्र बना हुआ है । साधकों के रहने के लिए केंद्र में 135 गुम्बदनुमा कुटियाएँ भी बनी हुई है। अथितियों के लिए तीन मंजिला अथिति गृह, एक बड़ा सभागार , महृषि ध्यान विद्यापीठ बहवां ओर महृषि का आवास बना हुआ है। 84 कुटियों ओर अन्य आवासों को गंगा नदी के छोटे पत्थरों से सजाया गया है और गुफाओं की दीवारों पर इन्ही पत्थरों से 84 योग आसनों की मुद्राएं अंकित की गई है।

कब और कैसे हुई इस चौरासी कुटिया की दुर्दशा-

सन 1963 के बाद से ही महेश योगी के इस ध्यान और साधना केंद्र के प्रति दुनिया भर के लोगो मे जबरदस्त आकर्षण था। विदेशियों का यंहा तांता लगा रहता था। महृषि के इस ध्यान केंद्र ने दुनिया भर में भारतीय योग और अध्यात्म को एक नई पहचान दी थी। मगर सरकार की उपेक्षा के चलते 80 के दशक में ये ध्यान केंद्र वीरान होने लगा। दरअसल सन 1983 में सरकार में राजा जी राष्ट्रीय पार्क की स्थापना की थी। महृषि का ये ध्यान केंद्र जिस क्षेत्र में पड़ता था वो राजा जी राष्ट्रीय पार्क अंतर्गत आ गया था ओर संरक्षित वन क्षेत्र घोषित हो गया। इसलिए महृषि सन 1983 में ध्यान केंद्र को छोड़कर चले गए। उनके जाने के बाद राजा जी पार्क के अधिकारियों और तत्कालीन सरकारों ने इस ध्यान केंद्र की सुध नही ली और दुनिया को शांति का पाठ पढ़ाने वाले ये केंद्र खंडहर में तब्दील होने लगा। स्थानीय निवासी सुनील अग्रवाल बताते है कि सन 1983 तक यह ध्यान केंद्र स्वर्ग की तरह था। बहुत ही खूबसूरत जगह थी। यंहा पर विभिन्न तरह के फव्वारे लगे हुए थे, कुटियों में हर तरह की सुख सुविधा जैसे बाथरूम में कीमती बाथ टब, खूबसूरत नालों की टोंटियां। शानदार नक्काशी वाला फर्नीचर था, खिड़की दरवाजे भी बहुत खूबसूरत थे। यंही पर बैंक, पोस्ट आफिस भी थे मगर उपेक्षा के चले सब बर्बाद हो गया और सभी कीमती सामान यहाँ से लोग उखाड़ कर ले गए।

अब फिर से गुलजार होगी महृषि की चौरासी कुटिया-

35 साल बाद अब कंही आकर सरकार को चौरासी कुटिया की सुध आई है। सरकार चौरासी कुटिया को अब फिर से पुनर्जीवित कर उसका रख रखाव करने जा रही है। पयर्टन मंत्री सतपाल महाराज ने दुनिया के इस अद्भुत ध्यान केंद्र को फिर से दुनिया मे पुरानी पहचान देने के लिए बड़ी योजना बनाई है। 1 से 7 मार्च तक आयोजिय अंतरराष्ट्रीय योग महोत्सव में बीटल्स रॉक बैंड, ओर बीटल्स की रचना करने वाले फेब फॉर में से जीवित 2 को भी बुलाया जा रहा है। चौरासी कुटिया में भी योग और ध्यान के साथ बीटल्स बैंड भी सुर ताल से पुरानी यादें ताजा करेंगे। पयर्टन मंत्री सतपाल महाराज का कहना है कि यंहा पर बीटल्स की यादगार के रूप में एक संग्रहालय भी बनाया जाएगा । बीटल्स की 50 वीं वर्षगांठ पर समारोह के आयोजन की खबर सुनते ही कई देशों से महृषि के अनुयायियों ने ऋषिकेश पंहुचना शुरू कर दिया है। यंहा आकर महृषि के अनुयायियों को अद्भुत अनुभव हो रहा है। उत्तराखंड सरकार की कोशिशों से राजा जी पार्क की गोहरी रेंज में 15 एकड़ में बना महर्षि का ध्यान केंद्र जल्द ही फिर से दुनिया भर के लोगो के लिए आकर्षण का केंद्र बनेगा।

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