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भारतीय संस्कृति विश्व की सर्वश्रेष्ठ संस्कृति- डॉ प्रणव पण्ड्या

शान्तिकुंज में तीन दिवसीय शिक्षक गरिमा शिविर का शुभारंभ

हरिद्वार ,
गायत्री परिवार प्रमुख डॉ. प्रणव पण्ड्या ने कहा कि भारतीय संस्कृति विश्व की सर्वश्रेष्ठ संस्कृति है। भारतीय संस्कृति मानव जीवन के विकास को उच्च स्तर पर ले जाने की कला सिखाती है। संस्कृति कुविचारों को मिटाती है, तो वहीं सुसंस्कारों का पोषण करती है।
वे भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा प्रकोष्ठ द्वारा आयोजित तीन दिवसीय शिक्षक गरिमा शिविर के प्रथम दिन प्रतिभागियों को संबोधित कर रहे थे। इस शिविर में मध्यप्रदेश व महाराष्ट्र से आये भासंज्ञाप जिला समन्वयकों व शिक्षकगण शामिल हैं। गायत्री परिवार के अभिभावक डॉ. पण्ड्या ने कहा कि संस्कार, संस्कृत व संस्कृति से ही विश्व का नवनिर्माण हो सकता है। भासंज्ञाप के माध्यम से विद्यार्थियों में इसके बीज बोये जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि हमारी संस्कृति के पास विश्व की समस्त समस्याओं का समाधान निहित है। डॉ. पण्ड्या ने कहा कि सभ्यता बहिरंग है जो बाह्य जीवन पद्धति सिखाती है, जबकि संस्कृति अंतरंग है और विचारों का परिशोधन करते हुए आगे बढ़ना, पीड़ितों की सेवा करना सिखाती है। शिक्षा व विद्या पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि शिक्षा जहाँ सभ्यता के विकास एवं व्यावहारिक ज्ञान के संर्वधन के लिए आवश्यक है, वहीं विद्या अपने जीवन के उद्देश्यों को समझने, अनगढ़ता को सुगढ़ता में बदलने और जीवन जीने की कला के शिक्षण में रूप में जरूरी है। डॉ. पण्ड्या ने विद्या और अविद्या के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी।

उन्होंने कहा कि आज का युवा नचिकेता, विवेकानंद, पं. श्रीराम शर्मा आचार्य जी के जैसे  सकारात्मक विचारों के साथ जीवन जिये तो स्वयं के साथ उनके निकटवर्ती लोग भी सही दिशा में चलने लगेंगे।  उन्होंने कहा कि इसके लिए वर्तमान शिक्षण पद्धति में भी बदलाव की जरुरत है, जो स्कूली शिक्षा के साथ ही उनमें जीवन जीने की कला के साथ नैतिक मूल्यों के विकास संबंधी विषय भी सम्मिलित रहें। उन्होंने कहा कि जीवन में ऊँचाइयों को छूना हो, तो महापुरुषों की जीवनी, श्रेष्ठ साहित्यों के नियमित रूप से अध्ययन करना चाहिए एवं सद्गुणों को जीवन में अपनाना चाहिए। इस अवसर पर शांतिकुंज के अनेक वरिष्ठ कार्यकर्त्ता, मप्र व महाराष्ट्र से आये जिला समन्वयक व शिक्षकगण उपस्थित रहे। मंच संचालन भासंज्ञाप के समन्वयक प्रदीप दीक्षित ने किया।
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