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कांवड़ यात्रा में उड़ रही है वन्य जीव कानून की धज्जियां, दर्जनों अजगर और सांपो को गले में लिए नाच रहे है शिवभक्त, देखे रोंगटे खड़े कर देने वाला वीडियो

हरिद्वार

सांप जिनका नाम सुनकर ही शरीर मे सिहरन दौड़ने लगती है, और अगर सामने आ जाये तो दिखाई देने लगती है साक्षात मौत। सांप जिसको देखकर छा जाती है दहशत। अगर किसी को सांप काट ले तो उसका बचना लगभग नामुमकिन सा ही होता है। मगर क्या आप इसकी कल्पना भी कर सकते है कि कोई सामान्य आदमी एक नही, दो नही, तीन चार नही बल्कि एक दर्जन से ज्यादा जिंदा और खतरनाक सांपो और अजगरों के साथ खुलेआम घूमता रहे। यह सोचकर ही रूह कांपने लगती है, मगर ऐसा नजारा दिखाई दिया आज हरिद्वार में चल रही कांवड़ यात्रा में।  कांवड़ यात्रा में भगवान शिव के भक्त कांवड़िये अलग अलग रंगों व रूपो में दिखाई देते है। शिव भक्त कांवड़िए शिव के वेश में आते है और गंगा जल लेकर भगवान शिव के वेश में ही नृत्य करते हुए लोगो का मनोरंजन करते हुए जाते है।

कांवड़ियों के एक ग्रुप के वायरल विडीयो में ऐसे ही कांवड़ियों का एक ग्रुप हरिद्वार से गंगा जल लेकर वापस जब जा रहा था तो जो नजारा दिखाई दिया वह न केवल हैरतअंगेज था बल्कि किसी की भी रूह कंपा देने वाला था। इस वायरल वीडियो में कांवड़िए शिव व पार्वती के रूप में एक झांकी के रूप में जा रहे है और शिव बने कलाकार के गले मे एक नही दो नही बल्कि पूरे पांच विशालकाय जिंदा अजगर पड़े हुए है। उसने अपने हांथों में भी आधा दर्जन से अधिक खतरनाक प्रजाति के जिंदा सांप ले रखे है और नृत्य करते हुए जा रहे है।

देखे विडियो

सबसे आश्चर्य की बात तो यह है कि शिव भक्त कांवड़िए खुलेआम हजारो लोगो, पुलिस कर्मियों के सामने से दर्जनों जिंदा सांप और अजगर के साथ उनका प्रदर्शन करते हुए निकल जाए रहे है और किसी ने भी उन्हें रोकने की कोशिश तक नही की जबकि वन्य जीव संरक्षण कानून के तहत ये सब प्रतिबंधित श्रेणी में आते है। हमने जब इस बारे में हरिद्वार के प्रभागीय वन अधिकारी आकाश वर्मा से बात की तो वह भी इस बात से हैरान रह गए कि वाइल्ड लाइफ प्रोटेक्शन एक्ट के तहत प्रतिबंधित रेप्टाइल श्रेणी के जंतुओं के साथ कांवड़िए बेरोकटोक चले जा रहे है। आकाश वर्मा ने कहा कि एक्ट में रेप्टाइल यानी रेंगने वाले जंतु अनुसूची 1 के तहत प्रतिबंधित श्रेणी में आते है। अजगर जैसे जंतु को रखने के लिए वन कानून के तहत मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक से लाइसेंस लेना अनिवार्य है। उंन्होने कहा कि मेरे संज्ञान में फ्रंट पेज न्यूज़ द्वारा यह मामला लाया गया है और हम उनकी तलाश करवाते है कि यह कांवड़िए कंहा तक पंहुचे है। इनका पता लगाकर इनके पास से अजगर और सांपों को जब्त कर उन्हें जंगल मे छोड़ा जाएगा।

शिव और सांप का क्या है संबंध और क्या है इस बारे में धार्मिक मान्यता
शिव भक्त कुछ कांवड़िये शिव के प्रति श्रद्धा और आस्था में बहकर ही शिव रूप में आते है। कुछ कांवड़िए उन्ही के प्रतिरूप को दर्शाने के लिए ही गले मे सर्पों को धारण कर लेते है।क्योंकि भगवान शिव अपने गले मे हर वक्त सांप धारण किये रहते है क्योंकि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार केवल शिव ही सर्प धारण कर सकते है। ज्योतिषाचार्य डॉक्टर प्रतीक मिश्रपुरी बताते है कि शिव सृष्टि के पालनहार है और उन्हें मृत्यु का देवता भी माना जाता है। सर्प यानी सांप मृत्यु का प्रतीक है। सांप विषधर होता है और सृष्टि में केवल भगवान शिव ही एकमात्र ऐसी शक्ति है जो विष को अपने कंठ में धारण किये हुए है। यानी विष पीने का अधिकार केवल शिव को है। उसी विषधर को भगवान शिव अपने गले मे धारण किये रहते है। उनका कहना है कि सर्प को धारण करने का अधिकार तीनो लोंको में केवल भगवान शंकर को है। प्रतीक मिश्रपुरी इंसान द्वारा सर्प को धारण करने को गलत बताते है, उनका कहना है कि सांप मृत्यु का प्रतीक है और सर्प को इंसान द्वारा धारण करने से शनि ग्रह भी कुपित होता है। अगर इंसान सर्प धारण करता है तो वह ज्योतिषी दृष्टि से शनि को कुपित कर मृत्यु को आमंत्रण देता है। इसलिए इंसान को सर्पों सहित विषधारी जंतुओं से दूर रहने को कहा जाता है।
वन्य जीव कानून क्या कहता है इस बारे में
वन्य जीव जंतुओं के संरक्षण, संवर्धन, उनके शिकार व तस्करी को रोकने, वन्य जीवों के और उनके अंगों का अवैध व्यापार रोकने के लिए भारत सरकार ने वन्य जीव संरक्षण अधिनियम 1972 बनाया जिसे सन 2003 में संशोधित किया गया। वाइल्ड लाइफ प्रोटेक्शन सोसाइटी ऑफ इंडिया के प्रोजेक्ट मैनेजर राजेन्द्र अग्रवाल का कहना है कि अगर कांवड़िए इस तरह से सांप व अजगर साथ लेकर जा रहे है ये गैरकानूनी है। वन्य जीव संरक्षण अधिनियम 1972 में वन्य जीवों को 6 अनुसूचियों में विभाजित किया हुआ है जिनमे रेप्टाइल प्रजाति के जंतु भी शामिल है। अनुसूची एक मे शामिल जंतुओं को रखना गैरकानूनी अपराध है और इसके उल्लंघन करने पर 3 से 7 साल की सजा और 10 से 25 हजार के जुर्माने का प्रावधान है। उंन्होने बताया कि इस तरह से सांपो को साथ रखना गैर कानूनी तो है ही यह बेहद खतरनाक भी हो सकता है। इस तरह सांपो को साथ ले जाने से कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।

वन्य जीवों के संरक्षण में लगे संगठनों का क्या है कहना

 खुलेआम वन्यजीव कानून की धज्जियां उड़ाते हुए कांवड़िए  प्रतिबंधित और खतरनाक प्रजाति के सांपों और अजगरों के साथ जाने से वन्य जीव संरक्षण में लगे संगठन हैरान है। मेनका गांधी के संगठन पीपल फ़ॉर एनिमल की उत्तराखंड प्रमुख गौरी मैलुखि कहती है कि इस तरह यदि कांवड़िए  इतनी बड़ी संख्या में सांपो और अजगरों को अपने साथ प्रदर्शन करते हुए ले जा रहे है तो यह वन विभाग की नाक़ाबलियात है। आखिर इस तरह से प्रतिबंधित श्रेणी के जंतुओं को प्रदर्शित किया जा रहा है और सरकार, पुलिस, वन विभाग किसी को इसकी परवाह ही नही है। गौरी सवाल उठाती है कि आखिर कांवड़ियों के पास इतनी बड़ी संख्या में प्रतिबंधित जंतु कैसे और कंहा से आये ये बहुत गंभीर मामला है। उनका कहना है कि किसी सामान्य व्यक्ति के पास इतनी बड़ी संख्या में सांप व अजगर नही हो सकते है। इसमें निश्चित रूप से वन्य जंतुओं की तस्करी में लगे किसी रैकेट के पास ही हो सकते है। उनका कहना है कि वन विभाग व पुलिस को तुरंत इन्हें तलाश कर करवाई करनी चाहिए और यह पता लगाया जाना चाहिए कि इन सांपो और अजगरों का सप्लायर कौन है। गौरी के अनुसार वन्य जंतु संरक्षण अधिनियम की अनुसूची 1 की धारा 9 में यह गैर जमानती अपराध है। इस तरह से प्रतिबंधित वन्य जीव साथ रखना या किसी व्यक्ति के पास इनका जिंदा पाया जाना इनके शिकार की श्रेणी में आता है।
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