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वन विभाग और हरिद्वार पुलिस का दावा, सांपो के साथ कांवड़ियों के डांस का वायरल वीडियो पुराना है। क्या है एक दर्जन से ज्यादा सांपो और अजगरों के साथ शिव के वेश में कांवड़िए के डांस के वायरल वीडियो और दावों का सच

हरिद्वार,
कांवड़ यात्रा के दौरान कांवड़िए द्वारा खतरनाक सांपो और अजगरों के साथ डांस करने के वायरल हो रहे वीडियो के मीडिया की सुर्खियां बनने से हरिद्वार पुलिस प्रशासन और वन विभाग में हड़कंप मचा हुआ है। हरिद्वार पुलिस इस वीडियो को हरिद्वार में चल रहे कांवड़ यात्रा के दौरान बनाये जाने की खबर से परेशान है। आज दिन भर हरिद्वार से लेकर उत्तर प्रदेश , दिल्ली तक पुलिस और वन विभाग सड़को पर सांपो और अजगरों के साथ डांस करते इन कावंड़ियों की खोजबीन करती रही। पुलिस, मीडिया और वन विभाग की दिन भर की जांच में यह सामने आया कि जिस वायरल वीडियो को हरिद्वार कांवड़ यात्रा में 2 दिन पहले ही बनाया जाना बताया जा रहा है, वह दरअसल पिछले साल बनाया गया है। यह वीडियो यू ट्यूब पर अपलोड है। यू ट्यूब पर भी इस वीडियो से यह साबित नही हो पा रहा है कि यह कंहा का वीडियो है। 
    इस वायरल वीडियो के मीडिया में वन कानून के उल्लंघन की खबरे बनने से सबसे ज्यादा उंगलियां वन विभाग पर उठ रही थी कि आखिर वन्य जीव संरक्षण कानून में प्रतिबंधित श्रेणी के अजगरों और सांपो के साथ और वह भी इतनी बड़ी संख्या में एक साथ लेकर डांस करने पर किसी ने रोक क्यों नही लगाई। यही सवाल पुलिस प्रशासन से भी पूछे जा रहे थे कि सरेआम शिव के वेश में कथित कांवड़िए कैसे इतनी भारी सुरक्षा व्यवस्था के बावजूद सांपो अजगरों को लेकर डांस करते रहे और निकल भी गए। वन विभाग और पुलिस प्रशासन की इन सवालों ने परेशानी बढ़ा दी थी। अपनी फजीहत होते देख वन विभाग ने इस वीडियो की पड़ताल की और दावा कर दिया कि यह वीडियो पुराना है और दक्षिण भारत का है। हरिद्वार के प्रभागीय वन अधिकारी आकाश वर्मा ने आज पत्रकारों के सामने यह दावा किया कि यह पुराना वीडियो है और दक्षिण भारत मे कंही बनाया गया है। उंन्होने दावा किया कि शायद यह वीडियो दक्षिण भारत के  किसी धार्मिक आयोजन के दौरान बनाया गया है। अब लगता है कि प्रभागीय वन अधिकारी ने वायरल वीडियो पर फजीहत से बचने के लिए सफाई देने से पहले वीडियो को ध्यान से नही देखा और जल्दबाजी में ऐसे दक्षिण भारत का होने का दावा कर दिया।
     अब उनके दावों की हकीकत असल मे क्या है यह वायरल वीडियो को देखने से ही पता लग रहा है। वीडियो में साफ लग रहा है कि यह वायरल वीडियो दक्षिण भारत का नही बल्कि उत्तर भारत का ही है। सांपो के साथ जो शख्स डांस करते हुए जिस वाहन पर जा रहा है उस पर एक बैनर लगा हुआ है जो हिंदी में लिखा हुआ है। वाइल्ड लाइफ प्रोटेक्शन सोसाइटी ऑफ इंडिया के प्रोजेक्ट मैनेजर राजेन्द्र अग्रवाल कहते है कि ये वीडियो हिंदी भाषी इलाके में ही बना हुआ लग रहा है। अगर यह वीडियो दक्षिण भारत मे बनाया गया होता तो वहां पर लगा बैनर हिंदी में नही लिखा हुआ होता। यही नही राजेन्द्र अग्रवाल बताते है कि शिव और पार्वती बने कलाकार भी  दक्षिण भारतीय नही बल्कि उत्तर भारतीय लग रहे है। वीडियो में जिस धुन पर डांस कर रहे है वह धुन भी हिंदी भाषी गानों की धुन लग रही है।
वायरल वीडियो की पड़ताल में यह तो साबित हो रहा है कि वह पुराना है, मगर प्रशासन और वन विभाग के इस वीडियो के दक्षिण भारत का होने के दावे झूठे है।
       सावन के महीने में कांवड़ यात्रा केवल हरिद्वार में या फिर बिहार के वैधनाथ धाम में ही बड़े स्तर पर चलती है। बनारस में भी कांवड़ यात्रा चलती है। इसलिए भले ही यह वीडियो पुराना हो मगर हरिद्वार , बनारस अथवा बिहार का हो सकता है। इस वीडियो को देखने से यह भी साफ है कि यह वीडियो इसी मौसम यानी गर्मियों के मौसम का है। वीडियो में शिव पार्वती बने कलाकार के साथ दिखाई दे रहे एक अन्य युवक ने टी शर्ट पहनी हुई है।
     भले ही वीडियो पुराना है मगर वन्य जीव कानून के जानकार इस तरह से सांपो और अजगरों के साथ डांस करने को गैर कानूनी बता रहे है। वाइल्ड लाइफ ट्रस्ट ऑफ इंडिया के मेंबर दिनेश पांडेय का कहना है कि वन्य जीव संरक्षण कानून में अजगरों को अनुसूची एक मे रखा गया है । इसी श्रेणी में जंगली शेर, चीता, हाथी, भालू आदि सहित अजगरों को भी रखा गया है। इस अनुसूची में शामिल वन्य जीव जंतुओं को रखने और शिकार करने पर 3 से 7 साल की सजा का प्रावधान है। उनका कहना है कि वन विभाग और प्रशासन को इसकी जांच करनी चाहिए कि आखिर इतनी बड़ी संख्या में प्रतिबंधित श्रेणी के रेप्टाइल इनके पास आये कंहा से। 
    शिव  के वेश में इस तरह से दर्जनों सांपो अजगरों के साथ भक्ति के प्रदर्शन को धर्म के जानकार भी गलत मानते है। ज्योतिषाचार्य प्रतीक मिश्रपुरी का कहना है कि यह भक्ति के नाम पर पाखंड और अंधविश्वास है और जानवरों पर अत्याचार है। इस तरह से भक्ति के नाम पर प्रदर्शन करने वाले लोगो के खिलाफ सख्त करवाई होनी चाहिए ।
 
 
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